Onam Festival 2023 – केरल की परंपरागत धरोहर में एक रंगीन मंगलमय उत्सव

भारत देश जो विविधता और भिन्नता का देश है, यहाँ कई रंगीन और मनमोहक त्योहार मनाए जाते हैं। इन त्योहारों में से एक त्योहार है “ओणम”, जो केरल राज्य के लोगों के बीच में एक महत्वपूर्ण और आनंदमय उत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस लेख में, हम ओणम त्योहार (Onam Festival) की खासियत, महत्व और उसकी परंपराओं को जानेंगे, जिससे हम इस मनमोहक उत्सव को और भी अधिक समझ सकेंगे।

ओणम, केरल का शानदार पारंपरिक त्योहार, एक ऐसा उत्सव है जो रंगों, संस्कृति और परंपराओं की अनगिनत झलकियों को साथ लाता है। इस त्योहार का केरल के लोगों के दिलों में अत्यधिक महत्व है और इसे उत्साह और जोश के साथ मनाया जाता है। इस ब्लॉग पोस्ट में, हम Onam Festival के समृद्ध सांस्कृतिक वायरस की खोज करेंगे, इसके इतिहास, रस्में, स्वादिष्ट खानों के भोजन और उस खुशी की आत्मा को खोजेंगे जो इस त्योहार के मौसम में राज्य को घेर लेती है।

ओणम की कहानी

ओणम की कहानी प्राचीन समय में जुड़ी है, जिसमें नोबल राजा महाबलि की कहानी है, जिन्हें दयानुषीलता और मानवता के प्रतीक के रूप में माना गया था। केरल के लोग उन्हें उनके न्यायपूर्ण शासन और बेनेवोलेंट स्वभाव के लिए सम्मानित करते थे।

Onam Festival

हिन्दू मिथकों के अनुसार, भगवान विष्णु ने राजा महाबलि का विशेष आदर किया था, और उन्हें वामन अवतार में अवतरित होकर उनके दरबार में पहुँचे थे। राजा महाबलि ने विश्वास किया कि वामन ब्राह्मण बच्चा है और उसने उसकी मांग की जिससे वह उसके पास आया था।

ओणम के त्योहार

ओणम त्योहार के आयाम और परंपराएँ इसे एक विशेष त्योहार बनाते हैं। त्योहार की शुरुआत “आतपू” नामक दिन से होती है, जो ओणम के 10 दिन के उत्सव की शुरुआत होती है। इसके बाद, दस दिनों तक विभिन्न प्रकार के परंपरागत खेल और कला कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। Onam Festival में भिन्न-भिन्न प्रकार के प्रोशन (कला कार्यक्रम) होते हैं, जिनमें संगीत, नृत्य, गीत, और अन्य कलाएं शामिल होती हैं।

Onam Festival को विशेष बनाने वाले एक महत्वपूर्ण कारण उसका संस्कृतिक महत्व है। यह त्योहार विविधता और समृद्धि की ओर एक कदम बढ़ने का समय होता है, जब लोग अपनी संस्कृति और आदिकालिक परंपराओं का आदर करते हैं। पुलिक्कल कला एक प्रमुख रंगीन आकर्षण है जो केरल में ओणम के दौरान आयोजित होता है। इसमें स्थानीय लोग अपने शरीर को विभिन्न रंगों में रंगते हैं और फिर एक विशेष प्रकार के नृत्य का प्रदर्शन करते हैं।

Onam Festival 2023 का महत्वपूर्ण समय

सूर्योदयAugust 29, 2023 6:19 AM
सूर्यास्तAugust 29, 2023 6:32 PM
तिरुवोणम नक्षत्र प्रारंभAugust 29, 2023 2:43 AM
तिरुवोणम नक्षत्र समाप्तAugust 29, 2023 11:50 PM

परंपरागत महत्व

ओणम त्योहार का परंपरागत महत्व केरल की सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है। इसे महाबाली की याद में मनाया जाता है, जिन्होंने केरल को सुख समृद्धि से भर दिया था। ओणम का महत्वपूर्ण हिस्सा बनते हैं फ्लावर रंगों से बने फ्लोरल रंगोली, जिसे “पूक्कलं” कहा जाता है। यह रंगोली मुख्य रूप से पंखुड़ियों से बनाई जाती है और यह त्योहार की रंगीनता और जीवन की उम्मीद को प्रतिनिधित्त करती है।

Onam Festival को मुख्य रूप से केरल राज्य में मनाया जाता है और यह वह समय होता है जब चिंबकनी पुनरावृत्ति (सर्वाहरितकरण) का आगमन होता है, जिसे “चिंबकनी उत्सव” के रूप में भी जाना जाता है। यह त्योहार चिंबकनी पुनरावृत्ति की पूजा और समृद्धि की प्राप्ति की शुभकामनाओं के साथ मनाया जाता है।

कर्णवली उत्सव: कर्णवली उत्सव ओणम के पहले दिन मनाया जाता है। इस उत्सव में लोग विभिन्न प्रकार के परिपर्णता गाने और नृत्य करते हैं।

पूकला: पूकला Onam Festival के दूसरे दिन मनाया जाता है, जिसमें पुराने गृहों को सजाने और साफ-सफाई करने का माहौल बनता है।

वलम कलम: वलम कलम एक प्रमुख खेल है जो ओणम के दूसरे दिन खेला जाता है। इसमें लोग बांधने और कूदने की प्रतियोगिता में भाग लेते हैं।

थुम्मटु: यह एक परंपरागत केरली नृत्य है जिसमें महिलाएँ उत्सव में भाग लेती हैं। यह गर्मियों में ही मनाया जाता है और लोग रंगीन वस्त्र पहनकर इसे नृत्य करते हैं।

सद्या: सद्या एक परंपरागत केरली भोजन है जो ओणम में परोसा जाता है। इसमें विभिन्न प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजन शामिल होते हैं।

वलप्पट्तू: वलप्पट्टू, ओणम के तीसरे दिन की एक खास प्रकार की धार्मिक प्रथा है जिसमें लोग अपने आशीर्वाद देने के लिए एक-दूसरे के घर जाते हैं।

पुलिकक्कु: पुलिकक्कु ओणम के चौथे दिन मनाया जाता है और यह फूलों की एक बड़ी बूँदी को स्वागत करने के रूप में किया जाता है।

ओणप्पु: ओणप्पु एक प्रकार की पर्वप्रारंभिक पूजा है जो Onam Festival के पांचवें दिन मनाई जाती है।

परंपरागत पहनावा

Onam Festival केरल की सांस्कृतिक धरोहर का अद्भुत हिस्सा है, जो भारतीय समृद्धि, एकता और परंपरागती मूल्यों का प्रतीक है। इस उत्सव के दौरान, लोग साझा करते हैं, आपसी मिलन स्थापित करते हैं और समृद्धि की कामनाएं करते हैं।

ओणम के उत्सव में लोग परंपरागत रूप से “कस्तूरी सारी” पहनते हैं, जो खासकर महिलाएं पहनती हैं। यह सारी विभिन्न रंगों में होती है और उसमें चित्रित फूलों की आकृतियाँ होती हैं। पुरानी परंपरा के अनुसार, यह सारी बिना खाली हाथ खरीदी नहीं जा सकती, जिससे एक समाज में आर्थिक समृद्धि की प्रतीक होती है।

समापन

Onam Festival एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्वपूर्ण त्योहार है जो केरल की परंपराओं को याद करने और मनाने का एक माध्यम है। इसमें रंगीन और साहित्यिक प्रकार के आयोजन होते हैं जो लोगों को एक-दूसरे के साथ मिलकर खुशियों का आनंद लेने का मौका देते हैं।

यह त्योहार वास्तविक रूप में एकता, सहयोग, और खुशियों की भावना को प्रकट करता है, जिससे यह न केवल एक त्योहार होता है, बल्कि एक भावना का प्रतीक भी। इसकी सुंदरता, रंगीनता, और भाषा बदलती दुनिया में एक अनूठा स्थान रखती है, जिससे यह एक अनमोल धरोहर साबित होता है।

FAQs

Q1. ओणम कब मनाया जाता है?

ओणम के त्योहार को चिंगम मास के पहले दिन से आखिरी दिन तक मनाया जाता है, जो कि अगस्त सितंबर के बीच होता है।

Q2. पुलिक्कल कला क्या है?

पुलिक्कल कला एक परंपरागत केरली नृत्य है, जो Onam Festival के दौरान प्रदर्शित किया जाता है।

Q3. सद्य में कौन-कौन से व्यंजन शामिल होते हैं?

सद्य में साउथ इंडियन व्यंजन जैसे कि सांबर, रसम, पयसम, वड़ा आदि शामिल होते हैं।

Q4. ओणम का मुख्य उद्देश्य क्या है?

ओणम का मुख्य उद्देश्य केरल की सांस्कृतिक धरोहर को बचाना और साझा करना है।

Q5. केरल के अलावा कहां-कहां ओणम मनाया जाता है?

केरल के अलावा, ओणम को कर्नाटक, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में भी मनाया जाता है।

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