सुखकर्ता दुखहर्ता आरती | Sukhkarta Dukhharta Aarti in Hindi

भगवान गणपति को उनके भक्तों के जीवन में सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। विश्वभर के हिन्दू, चाहे वो किसी भी महत्वपूर्ण यात्रा की शुरुआत कर रहे हों या अपने विवाह की तैयारी में हों, सबसे पहले वे भगवान गणेश की पूजा करते हैं। इस लेख में, हम भगवान गणेश सुखकर्ता दुखहर्ता आरती (Sukhkarta Dukhharta Aarti) के महत्व और इसके अनुष्ठानिक महत्व को जानेंगे।

भगवान गणेश को ‘विघ्नकर्त्ता’ भी कहा जाता है, जिसका मतलब होता है ‘बाधाओं का अंत करने वाला’। इसलिए भगवान गणेश की पूजा सबसे पहले की जाती है।

Sukhkarta Dukhharta Aarti
Sukhkarta Dukhharta Aarti

गणेश की मूर्ति के चार भुजाएं, वक्रतुंड (मोरपंख के समान) मुख, और हाथ में एक लकड़ी का झूला होता है। इन संकेतों के पीछे गहरा अर्थ छिपा होता है। गणेश की चार भुजाएं हमें योग का संकेत देती हैं, जिनमें मन, बुद्धि, चित्त, और अहंकार का प्रतिनिधित्व होता है। वक्रतुंड मुख का संकेत है कि हमें जीवन के विकट प्रस्थितियों का सामना करना होता है, और झूला हमारे जीवन के उतार-चढ़ाव को स्वीकार करने की प्रेरणा देता है।

Sukhkarta Dukhharta Aarti का महत्व सिर्फ गणेश चतुर्थी के समय ही नहीं होता, बल्कि पूरे वर्ष के दौरान भक्त गणेश आरती का पाठ करके शांति, खुशी और समृद्धि की प्राप्ति के लिए प्रार्थना करते हैं। गणेश आरती का पाठ करने के लिए सही समय यह होता है कि स्नान करके संध्या वंदना का पालन किया जाए। फिर गणेश स्तोत्र का पाठ करें, जिसमें ‘वक्रतुंड महाकाय’ जैसे मशहूर पंक्तियां होती हैं।

Sukhkarta Dukhharta Aarti

सुखकर्ता दुखहर्ता वार्ता विघ्नाची
 नूरवी पुरवी प्रेमा कृपा जयची
 सर्वांगी सुंदरा उति शेंदुराची
 कंठि झलके माला मुक्ताफलनि

जय देव जय देवा जय मंगलमूर्ति
 दर्शनमत्रे मनकामना पूर्ति

 रत्नाचिता फरा तुजा गौरीकुमारा
 चंदनची उति कुमकुमकेसरा
 हिर जादिता मुकुता शोभतो बारा
 रनहुँति नृप चरनि गहगारी

 जय देव जय देवा जय मंगलमूर्ति
 दर्शनमत्रे मनकामना पूर्ति

 लम्बोदर पीताम्बरा फणीवर बंधना
 सरला सोंडा वक्रतुण्ड त्रिनयन
दासा रामच वात पै साधना
 संकटी पावे निर्वाणी रक्षे सुरवरवन्दना

 जय देव जय देवा जय मंगलमूर्ति
 दर्शनमत्रे मनकामना पूर्ति 

भगवान गणेश के बारे में कई महत्वपूर्ण कथाएँ हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख हैं। एक प्रमुख कथा के अनुसार, माता पार्वती ने गणेश को अपने आराध्य बनाने का निर्णय लिया था। उन्होंने गोलू के तुरंत बनाने के लिए आपके भगिनी के गहने का चयन किया और उन्होंने गोलू को आकार देने के लिए मांस का पाउडर मिलाया। इससे गणेश का शरीर कुछ विचित्र और अद्वितीय हो गया।

गणेश चतुर्थी: भगवान का आगमन

भगवान गणेश की प्रतिमा को गणेश चतुर्थी के दिन विशेष आनंद और उत्साह के साथ घरों में स्थापित किया जाता है। इस दिन भगवान के भक्त उनकी पूजा-अर्चना करते हैं और उनके आशीर्वाद की प्राप्ति के लिए प्रार्थना करते हैं। यह त्योहार आपके घर में आपके परिवार के आपसी समरसता और सद्गुणों को प्रकट करता है।

गणेश को विघ्नकर्त्ता के रूप में जाना जाता है, जो बाधाओं को दूर करने वाले हैं। वे हमारे कार्यों में आने वाली चुनौतियों को दूर करते हैं और सफलता की ओर मार्ग प्रशस्त करते हैं। इसलिए, गणेश की पूजा सबसे पहले होती है, ताकि आपके कार्यों में कोई भी अचेतन बाधा न आ सके।

गणेश आरती और उपासना

Sukhkarta Dukhharta Aarti का पाठ करने से हम भगवान गणेश के प्रति अपनी श्रद्धा और विश्वास को प्रकट करते हैं। यह आरती हमारे जीवन में खुशियाँ, शांति, और समृद्धि की प्राप्ति के लिए प्रार्थना करती है। आपके दैनिक जीवन में Sukhkarta Dukhharta Aarti का पाठ करने से आपको स्थिरता और समरसता का अहसास होता है, जो आपके जीवन को सफल बनाने में मदद कर सकता है।

इस गणेश चतुर्थी पर, हम सभी गणपति बप्पा के साथ उनकी आराधना करते हैं और उनके आशीर्वाद की प्राप्ति के लिए प्रार्थना करते हैं। गणेश के इस महत्वपूर्ण त्योहार के माध्यम से हम उनके सृजनात्मकता, समरसता, और सभी को साथ लेकर चलने का सन्देश प्राप्त करते हैं, जो हमें हमारे जीवन के हर क्षेत्र में सफलता प्रदान कर सकते हैं।

इस Sukhkarta Dukhharta Aarti से, हमें गणपति बप्पा की पूजा-अर्चना के साथ उनके प्रति अपनी विशेष स्नेहभावना को प्रकट करने का अवसर मिलता है, जिससे हम उनके आशीर्वाद को प्राप्त कर सकते हैं और उनके मार्गदर्शन में अग्रसर हो सकते हैं। गणपति बप्पा के आगमन के साथ, हम अपने जीवन को सफलता और सुख की ओर बढ़ाने की प्रार्थना करते हैं, और उनकी कृपा से हमारे जीवन के सभी क्षेत्रों में आनंद और समृद्धि का आनंद लेते हैं। गणपति बप्पा की जय!

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